NEW HINDI SHAYARI नई हिंदी शायरी 2021

 NEW  HINDI  SHAYARI नई हिंदी शायरी 2021 

हर पल तेरे साथ जीना है हमको सच्चा प्यार करने वालो इस शायरी को पूरा सुने 

चंडी चाँद से होती है सितारों से नहीं और मोहब्बत एक से होती हजारो नहीं गुलाब के फूल को तोडा नहीं जाता है और अपनी जान  को कभी छोड़ा नहीं जाता है 


प्यार वह जिसे आई लव यु बोल कर जताया जाता है प्यार वह नहीं जिसे आई लव यू लू बोल क्र जताया जाता है प्यार तो वह है जिसे दिल से अपनाया जाता है 

कभी तुम नाराज हुए तो हम झुक जाएगे कभी हम नाराज हो तो आप गले लगा लेना अच्छा लगता है तेरा नाम मेरे नाम के साथ जैसे कोई सुभा जुडी हो किसी हसीं शाम के साथ बेशक तुम्हे गुस्सा करने का हक़ है मुज पर नाराजगी में कही ये मत भूल जाना ही हम बहुत प्यार करते है तुमसे 

ना जाने क्यों तुझे देखने के बाद भी तुझे ही देखते की चाहत रहती है ना चाहा था कभी कुछ तुम्हे चाहने से पहले तुम मिल जो गए ख्वाइशो पूरी हो गई

मोहब्बत साथ हो जरुरी नहीं पर मोहब्बत जिंदगी भर हो ये बहुत जरुरी है अच्छा लगता है जब मेरे बिना कुछ कहे बस मुझे देख कर तुम्हारे चेहरे पर मुस्कान आ जाती है 

तुम्हे अहसास ही नहीं कितना इश्क है तुमसे बस रोज थोड़ा और तुमसे जुड़ते जाते है हम 

जो दिल के खास होते है वो हर लम्हा आस पास होते है लफ्जो से कहा लिखी जाती है ये बेचेनिया मोहब्बत की मेने तो हर बार तुम्हे दिल की गहराइयों से पुकारा है 

सुन बस एक ही ख्वाहिश है की तुझे खुद से ज्यादा चाहु में तेरी या ना मेरी वफ़ा हमेशा याद  रहेगी इन आखो को जब तेरा दीदार हो जाता है दिन कोई भी हो मेरा त्यौहार हो जाता है 

निगाह ए इश्क का अजीब ही शोक देखा तुम ही को देखा और बेपनाह देखा अच्छा सुनो मुझे उस वक्त तुम पर बेहद प्यार आता है जब मेरे कहने से पहले ही तुम मेरे दिल की बात समझ जाती हो 

सुनो जाना आजादी के दिन भी मुझे कैद तेरी मोहब्बत की करदो ना मोहब्बत का शोक यहाँ किसे था तुम पास आते गए और मोहब्बत होती गई हमेशा उस इंसान के करीब रहो जो तूम्हे खुश रखे लेकीन उस इंसान के और भी करीब रहो जो तुम्हे खुश रखे लेकिन उस इंसान के और भी करीब रहो जो तुम्हारे बगैर खुश ना रह पाए

काश तुम कभी जोर से गले लगा कर कहो डरते क्यों पागल तुम्हारी ही तो हु हदे शहर  से निकली तो गांव गांव चली कुछ यादो मेरे संग पाव पाव चली सफर जो धुप का हुआ तो तजुर्बा हुआ वो जिंदगी ही क्या जो छाँव छाँव चली 

परिदो को मंजिल मिलेगी यकीनन ये फैले हुए उनके पर बोलते है अक्सर वो लोग खमोश रहते है ज़माने में जिनके हुनर बोलते है चलता रहुगा पथ पर चलने में महिर बन जाउगा या तो मिन्जिल मिल जाएगी या अच्छा मुसाफिर बन जाउगा 

उठो तो ऐसे उठो की फर्क हो बुलंदी को झुको तो ऐसे झुको की बंदगी भी नाज करे खोल दे पंख मेरे कहता है परिदा अभी और उड़ान बाकि है जमी नहीं है मजिल मेरी अभी पूरा आसमान बाकि है 

लहरों की ख़ामोशी को समंदर की बेवसी ना समझ ऐ नादा जितनी गहराई अंदर है बहार उतना तूफान है बाकि है आखो में मंजिले थी गिरे और सभलते रहे आँधियो में क्या दम था चिराग हवा में भी जलते रहे क्यों डरे की जिंदगी में क्या होगा हर वक्त क्यों सोचे की बुरा होगा 

बढ़ते रहे बस मंजिलो की और हमें कुछ मिले या न मिले तजुर्बा तो नया होगा जो मुस्कुरा रहा है उसे दर्द ने पाला होगा जो चल रहा उश्के पाँव में चला होगा बिना सघर्ष के इंसान चमक नहीं सकता जो जलेगा उसी दिये में तो उजाला होगा 


सुल्तान भी बन जाए दिल में फ़िक्र जिन्दा रख हौसले के तरकश में कोशिश का वो तीर जिन्दा रख हार जा चाहे जिंदगी में सब कुछ मगर फिर से जितने की उम्मीद जिन्दा रख 

यु जमीं पर बैठकर क्यों आसमान देखता हु पंखो को खोल जमाना सिर्फ उड़ान देखता हु युही नहीं मिलती राही को मंजिलो एक जूनून सा दिल में जगाना होता है पूछा चिड़िया से कैसे बनाया आशियाना बोली भरनी पड़ती है उड़ान बार बार तिनका उठाता होता है 

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